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Wednesday, August 21, 2013

राखी बंधन है ऐसा--राखी बंधन है ऐसा

ब्रह्मकुमारियों ने बांधी प्रधानमन्त्री को राखी 
ब्रह्मकुमारियां काफी लम्बे समय से लोगों को स्वच्छ, सात्विक और ऊंचे बैतिक मूल्यों पर आधारित जीवन जीने जा संदेश देती अ रही हैं। किसी समय शायद साठ और सत्तर में दशकों में उनका राज योग //सहज योग बेहद लोक प्रिय भी हुआ था। राखी के अवसर पर उन्होंने भी प्रधान मंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह को राखी बाँधी। इन पलों को झट से कैमरे में उतार पीआईबी के कैमरामैन ने। 

सूचना के अधिकार का वेब पोर्टल जारी

21-अगस्त-2013 19:45 IST
पोर्टल जारी किया श्री नारायणसामी ने
कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन तथा प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्‍य मंत्री श्री वी. नारायणसामी ने कहा है कि ऑन लाइन वेब पोर्टल सूचना के अधिकार कानून में एक नया मील का पत्‍थर है। उन्‍होंने कहा कि वेब पोर्टल जारी हो जाने के बाद नागरिकों की भागीदारी और अधिक होगी। पोर्टल जारी करने के दौरान उन्‍होंने कहा कि अभी यह सुविधा केन्‍द्रीय मंत्रालयों के संबंध में ही दी जा रही है, लेकिन जल्‍द ही इससे केन्‍द्र सरकार के अधीनस्‍थ कार्यालयों को भी जोड़ दिया जाएगा। 

श्री नारायणसामी ने राज्‍य सरकारों से आग्रह किया कि वे इसी प्रकार की सुविधाएं विकसित करें, ताकि सूचना के अधिकार के आवेदन पत्र ऑन लाइन प्राप्‍त किए जा सकें। उल्‍लेखनीय है कि ऑन लाइन वेब पोर्टल को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की पहल पर राष्‍ट्रीय सूचना विज्ञान केन्‍द्र ने विकसित किया है। इसकी वेबसाइट का पता http://rtionline.gov.in है। 

नागरिक सूचना के अधिकार का आवेदन पत्र और निर्धारित शुल्‍क का भुगतान भारतीय स्‍टेट बैंक के इंटरनेट बैंकिंग के जरिए तथा वीजा/मास्‍टर क्रेडिट/डेबिट कार्डों के जरिए कर सकते हैं। यह सुविधा भारत सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों के संदर्भ में उपलब्‍ध है। 

वि.कासोटिया/अरुण/दयाशंकर – 5746

Thursday, April 11, 2013

11-अप्रैल-2013 16:04 IST
भारत-रूस सहयोग समझौते पर हस्‍ताक्षर किए गए
भारत सरकार और रूसी संघ ने आपातकालीन प्रबंधन के क्षेत्र में 21 दिसंबर, 2010 को नई दिल्‍ली में हस्‍ताक्षर किए गए समझौता पत्र द्वारा स्‍थापित संयुक्‍त आयोग के संरचना कार्य और प्रक्रिया को परिभाषित करने वाले विनियमन पर 10 अप्रैल, 2013 को मॉस्‍को में, हस्‍ताक्षर किए। 

इस समझौता पत्र पर केंद्रीय गृह मंत्री श्री सुशील कुमार शिंदे और रूस संघ के नागरिक सुरक्षा, आपात स्थिति तथा प्राकृतिक आपदाओं के परिणाम के उन्‍मूलन मंत्री ने हस्‍ताक्षर किए। समझौते पत्र से दोनों देश आपातकालीन स्थितियों के परिणामों के बचाव और उन्‍मूलन क्षेत्र में एक-दूसरे का सहयोग कर सकेंगे। इससे दोनों देशों के बीच मित्रता को मजबूती मिलेगी और भारत-रूस सहयोग में वृद्धि होगी। 

भारत-रूस आयोग आपातकालीन प्रबंधन में सहयोग देने के लिए नई दिल्‍ली में 21 दिसंबर, 2010 हस्‍ताक्षर किए गए समझौता पत्र को लागू करना सुनिश्‍चित करेगा। भारत-रूस आयोग, आपदाओं की घटनाओं के समय दोनों देशों के लोगों की भलाई और सुरक्षा के लिए सहयोग तथा आपातकालीन प्रबंधन के क्षेत्र में वैज्ञानिक और तकनीक की जानकारी का आदान-प्रदान में भी योगदान देगा। संयुक्‍त आयोग की बैठक वैकल्पिक तौर पर भारत और रूस में आयोजित की जाएगी। (PIB)
मीणा/शोभा/लक्ष्‍मी-1813

Wednesday, April 10, 2013

पाकिस्तानी हिन्दुओ पर मानवाधिकार मौन ?//राजीव गुप्ता


पाकिस्तान मे उनके लिये अपनी अस्मिता को बचाये रखना मुश्किल है
                                                     Courtesy Photo 
मात्र तीन दिन के अपने बेटे को उसके दादा-दादी के पास छोड्कर पाकिस्तान से तीर्थयात्रा वीजा पर भारत आने वाली 30 वर्षीय भारती रोती हुई अपनी व्यथा बताते हुए कहती है कि “अगर मै अपने बेटे का वीजा बनने का इंतज़ार करती तो कभी भी भारत न आ पाती.” 15 वर्षीय युवती माला का कहना है कि पाकिस्तान मे उनके लिये अपनी अस्मिता को बचाये रखना मुश्किल है तो 76 वर्षीय शोभाराम कहते है कि वे भारत मे हर तरह की सजा भुगत लेंगे परंतु अपने वतन पाकिस्तान वापस नही जायेंगे क्योंकि हमारा कसूर यह है कि हमने हिन्दू-धर्म मे पाकिस्तान की धरती पर जन्म लिया है. मै अपनी आँखो के सामने अपने घर की महिलाओ की अस्मिता लुटते नही देख सकता कहते हुए 80 वर्षीय बुजुर्ग वैशाखी लाल की आँखे नम हो गयी. दरअसल यह दिल्ली स्थित बिजवासन गाँव के एक सामजिक कार्यकर्ता नाहर सिँह के द्वारा की गई आवास व्यवस्था मे रह रहे 479 पाकिस्तानी हिन्दुओ की कहानी है (कुल 200 परिवारो मे 480 लोग है, परंतु एक 6 माह की बच्ची का पिछले दिनो स्वर्गवास हो गया). एक माह की अवधि पर तीर्थयात्रा पर भारत आये पाकिस्तानी -हिन्दू अपने वतन वापस लौटने के लिये तैयार नही है, साथ ही भारत-सरकार के लिये चिंता की बात यह है कि इन पाकिस्तानी हिन्दुओ की वीजा-अवधि समाप्त हो चुकी है.
इतिहास के पन्नो मे दर्ज 15 अगस्त 1947 वह तारीख है, जिस तारीख को भारत न केवल भौगोलिक दृष्टि से दो टुकडो मे बँटा अपितु लोगो के दिल भी टुकडो मे बँट गये. पाकिस्तान के प्रणेता मुहमद अली जिन्ना को पाकिस्तान में हिन्दुओं के रहने पर कोई आपत्ति नहीं थी ऐसा उन्होंने अपने भाषण में भी कहा था  कि “क्योंकि पाकिस्तानी -  संविधान के अनुसार पाकिस्तान कोई मजहबी इस्लामी देश नहीं है , तथा विचार अभिव्यक्ति से लेकर धार्मिक स्वतंत्रता को वहा के संविधान के मौलिक अधिकारों में शामिल किया गया है.”  विभाजन की त्रासदी से लेकर अब तक गंगा-यमुना मे बहुत पानी बह चुका है. ज़ख्मो को भरने के लिये दोनो देशो के बीच आगरा जैसी कई वार्ताएँ हुई, टी.वी चैनलो पर कार्यक्रम किये गये, बस व रेलगाडी चलाई गयी, क्रिक़ेट खेला गया परंतु  ज़ख्म तो नही भरा, इसके उलट विभाजन का यह ज़ख्म एक् नासूर बन गया. स्वाधीन भारत की प्रथम सरकार मे उद्योग मंत्री डा. श्यामाप्रसाद मुखर्जी के पुरजोर विरोध के उपरांत भी अप्रैल 1950 मे भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और लियाकत अली के साथ एक समझौता किया जिसके तहत भारत सरकार को पाकिस्तान मे रह रहे हिन्दुओ और सिखो के कल्याण हेतु प्रयास करने का अधिकार है. परंतु वह समझौता मात्र कागजी ही सिद्ध हुआ. पाकिस्तान में रह रहे हिन्दुओ ने हिन्दुस्तान में शरण लेने के लिए ज्योहि पलायन शुरू किया, विभाजन के घाव फिर से हरे हो गये. पर कोई अपनी मातृभूमि व जन्मभूमि से पलायन क्यों करता है यह अपने आप में एक गंभीर चिंतन का विषय है. क्योंकि मनुष्य का घर-जमीन मात्र एक भूमि का टुकड़ा न होकर उसके भाव-बंधन से जुड़ा होता है. समाचारो से पता चलता है कि पाकिस्तान में आये दिन हिन्दूओ पर जबरन धर्मांतरण, महिलाओ का अपहरण, उनका शोषण, इत्यादि जैसी घटनाएँ आम हो गयी है.
प्रकृति कभी भी किसी से कोई भेदभाव नहीं करती और इसने सदैव ही इस धरा पर मानव-योनि  में जन्मे सभी मानव को एक नजर से देखा है. हालाँकि मानव ने समय – समय पर अपनी सुविधानुसार दास-प्रथा, रंगभेद-नीति, सामंतवादी इत्यादि जैसी व्यवस्थाओं के आधार पर मानव-शोषण की ऐसी कालिमा पोती है जो इतिहास के पन्नो से शायद ही कभी धुले. समय बदला. लोगो ने ऐसी अत्याचारी व्यवस्थाओं के विरुद्ध आवाज उठाई. विश्व के मानस पटल पर सभी मुनष्यों को मानवता का अधिकार देने की बात उठी परिणामतः विश्व मानवाधिकार का गठन हुआ. मानवाधिकार के घोषणा-पत्र में साफ शब्दों में कहा गया कि मानवाधिकार हर व्यक्ति का जन्म सिद्ध अधिकार है, जो प्रशासकों द्वारा जनता को दिया गया कोई उपहार नहीं है तथा इसके मुख्य विषय शिक्षा ,स्वास्थ्य ,रोजगार, आवास, संस्कृति ,खाद्यान्न व मनोरंजन इत्यादि से जुडी मानव की बुनयादी मांगों से संबंधित होंगे. इसके साथ-साथ अभी हाल में ही पिछले वर्ष मई के महीने में पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी  द्वारा मानवाधिकार कानून पर हस्ताक्षर करने से वहाँ एक राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग कार्यरत है.
ध्यान देने योग्य है कि अभी कुछ दिन पहले ही  पाकिस्तान  हिंदू काउंसिल के अध्यक्ष जेठानंद डूंगर मल कोहिस्तानी के अनुसार पिछले कुछ महीनों में बलूचिस्तान और सिंध प्रांतों से 11 हिंदू व्यापारियों सिंध प्रांत के और जैकोबाबाद से एक नाबालिग लड़की मनीषा कुमारी के अपहरण से हिंदुओं में डर पैदा हो गया है. वहा के  कुछ टीवी चैनलों के साथ - साथ पाकिस्तानी अखबार डॉन ने  भी 11 अगस्त के अपने संपादकीय में लिखा कि  ‘हिंदू समुदाय के अंदर असुरक्षा की भावना बढ़ रही है’  जिसके चलते जैकोबाबाद के कुछ हिंदू परिवारों ने धर्मांतरण, फिरौती और अपहरण के डर से भारत जाने का निर्णय किया है.  पाकिस्तान हिन्दू काउंसिल के अनुसार  वहां हर मास लगभग  20-25 लड़कियों का धर्म परिवर्तन कराकर शादियां कराई जा रही हैं.  यह संकट तो पहले केवल बलूचिस्तान तक ही सीमित था, लेकिन अब इसने पूरे पाकिस्तान को अपनी चपेट में ले लिया है. रिम्पल कुमारी का मसला अभी ज्यादा पुराना नहीं है कि उसने साहस कर न्यायालय का दरवाजा  तो खटखटाया, परन्तु वहाँ की उच्चतम न्यायालय भी उसकी मदद नहीं कर सका और अंततः उसने अपना हिन्दू धर्म बदल लिया. हिन्दू पंचायत के प्रमुख बाबू महेश लखानी ने दावा किया कि कई हिंदू परिवारों ने भारत जाकर बसने का फैसला किया है क्योंकि यहाँ की  पुलिस अपराधियों द्वारा फिरौती और  अपहरण के लिए निशाना बनाए जा रहे हिंदुओं की मदद नहीं करती है. इतना ही नहीं पाकिस्तान से भारत आने के लिए 300 हिंदू और सिखों के समूह  को पाकिस्तान ने  अटारी-वाघा बॉर्डर पर रोक कर सभी से वापस लौटने का लिखित वादा लिया गया. इसके बाद ही इनमें से 150 को भारत आने दिया गया.
अभी पिछले दिनो  पाकिस्तान द्वारा हिन्दुओ पर हो रही ज्यादतियों पर भारत की संसद में भी सभी दलों के नेताओ ने एक सुर में पाकिस्तान की आलोचना की जिस पर भारत के विदेश मंत्री ने सदन को यह कहकर धीरज बंधाया कि वे इस  मुद्दे पर पाकिस्तान से बात  करेंगे परन्तु पाकिस्तान से बात करना अथवा संयुक्त राष्ट्र में इस मामले को उठाना तो दूर यूंपीए सरकार ने इस मसले को ही ठन्डे बसते में डाल दिया और आज तक एक भी शब्द नहीं कहा. पाकिस्तान में रह रहे हिन्दुओ पर की जा रही बर्बरता को देखते हुए हम मान सकते है कि विश्व-मानवाधिकार पाकिस्तान में रह रहे हिन्दुओ के लिए नहीं है यह सौ प्रतिशत सच होता हुआ ऐसा प्रतीत होता है. भारत के कुछ हिन्दु संगठनो के लोगो के अनुसार इन पाकिस्तानी हिन्दुओ द्वारा इस सम्बन्ध में पिछले माह (मार्च) में ही भारत के राष्ट्रपति, प्रधान मंत्री, गृह मंत्री, विदेश मंत्री, कानून मंत्री, दिल्ली के उपराज्यपाल व मुख्यमंत्री के साथ  सभी संबन्धित सरकारी विभागों सहित भारत व संयुक्त राष्ट्र संघ के मानवाधिकार आयोगों को भी पत्र भेजा जा चुका है किन्तु आज तक किसी के पास न तो इन पाक पीडितों का दर्द सुनने की फ़ुर्सत है और न ही किसी ऐसी कार्यवाही की जो पाकिस्तानी दरिंदगी पर अंकुश लगा सके. तो क्या यह मान लिया जाय कि पाकिस्तान के 76 वर्षीय शोभाराम का कहना सही ही है कि पाकिस्तानी हिन्दू अपने हिन्दू होने की सजा भुगत रहे है और उनके लिए मानवाधिकार की बात करना मात्र एक छलावा है ? ऐसी वीभत्स परिस्थिति मे यदि समय पर विश्व मानवाधिकार ने इस गंभीर समस्या पर कोई संज्ञान नहीं लिया यह अपने आप में विश्व मानवाधिकार की कार्यप्रणाली और उसके उद्देश्यों की पूर्ति पर ऐसा कुठाराघात है जिसे इतिहास कभी नहीं माफ़ करेगा.
-      राजीव गुप्ता एक स्वतंत्र पत्रकार हैं और आज के इस कारोबारी युग में भी आदर्शों और मानवता के हित को सामने रख कर लिखते हैं। आप पंजाब स्क्रीन में पहले भी उनकी बहुत सी विचारोतेजक रचनायें पढ़ चुके हैं। इस रचना में भी उन्होंने तर्क और तथ्यों को सामने रख कर बात की है. आपके विचारों की इंतजार बनी रहेगी। राजीव गुप्ता जी सेसम्पर्क के लिए य्नका फोन नम्बर है:  9811558925...........